Bachpan ka vo pyare din.

 यह कबिता हम अपना Bachpan ka vo pyare din याद दिलाती है! हम सब अपना बचपन को आज वी याद करते  है! बचपन होता ही बहुत प्यारा है! 
                                         

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                    Bachpan ka vo pyare din
                    
वो स्कूल जाना , आगे बाले डेस्क पर बैठना आज वी याद है !
वो क्लास की अटेंडेंस, डस्टर न लाना, चाक ना लाना आज वी याद है !
चेयर ना लाना और टीचेर से डॉट खाना आज वी याद है !
वो टेस्ट ना देना , फिर बच्चो के पेपर चेक करना अाज  वी  याद है !
आधा मार्क्स कम होने पर ग्राउंड में  पुनिशमेंट मिलना  आज वी  याद है !
वो बचपन की कुश खट्टी मीठी यादे जीना सोचकर हँसी आती है ! हाँ हाँ हाँ 
वो सारी बातें मुझे  आज वी  याद है !
कहने को तो बहुत अच्छा था बच्चपन , लेकिन अभी भी कुश लम्हे ओर जीने को जी चाहता है !
कही कुश बातें , कुश बचपन शूट गया है, आज जीना की है तम्मना की जी लू थोड़ा सा और बचपन ,
उन्ही दोस्तों  के साथ , उन्ही जज्बात के साथ !
लेकिन उस बचपन मे  वो ना आये, जिसके कारण आज फिर बचपन जीना चाहता  हूँ !
वो अधूरा बचपन , एक दिन जरूर पूरा होगा !
एक नये जज्बात के साथ , एक नये एहसास के साथ , एक नयी उमंग के साथ ! 

आप सबको Bachpan ka vo pyare din कबिता अच्छी लगी होगी !  


Bachpan ka vo pyare din. Bachpan ka vo pyare din. Reviewed by My words in my way on September 06, 2018 Rating: 5

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